नजरें इधर भी..कोरबा जिले में इस गांव के ग्रामीण दशकों से गम्भीर बीमारी की चपेट में, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक ग्रसित

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पानी मे क्लोराईड की मात्रा बनी है वजह,सरकार की योजनाएं भी दूर दूर तक नदारत।

रितेश गुप्ता कोरबा:सरकार के बड़े बड़े वादे  दावे उस समय धरे के धरे रह जाते हैं जब 21 वी सदी में कोई गाँव अछूता सा नजर आता है।यहाँ सरकार की बड़ी बड़ी योजनाएं धरातल पर पाँव पसारने से पहले ही दम तोड़ देती है।जिला कोरबा का ब्लाक पाली अंतर्भूत एक ऐसा गाँव,जहाँ दशकों से ग्रामीण अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे है।यहाँ के निवासी कमर दर्द, अकड़न,दांतो की सड़न जैसी गम्भीर बीमारियों से ग्रसित हैं।ग्रामीणों के अनुसार ये बीमारियां उन्हें पानी के उपयोग करने से हो रही है,यहाँ के पानी मे अत्यधिक क्लोराइड की मात्रा इसका मुख्य कारण बना हुआ है।

जिला कोरबा के अंतर्गत ब्लाक पाली में ग्राम पंचायत डोड़की का आश्रित गाँव महुआपनी दूरस्थ वनांचल छेत्र है।यहाँ के ग्रामीण मुख्य रूप से वनों से होने वाली आय पर ही निर्भर है।गाँव मे मौजूद पानी के स्रोतों से निकलने वाला क्लोराइड युक्त पानी ग्रामीणों के जीवन पर ग्रहण लगा रहा है।यहां बच्चो से लेकर बुजुर्ग तक गम्भीर बीमारियो की चपेट में हैं।क्लोराईड युक्त पानी के सेवन से ग्रामीणों में कमर दर्द,रीढ़ की हड्डी में झुकाव, शरीर मे अकड़न,हाथ पांव दर्द,दांतो में सड़न जैसी बीमारियां पनप रही है।समय से पहले ही शरीर कमजोर होने के साथ झुक रहा है।गम्भीर बीमारियों की वजह से यहाँ निवासरत ग्रामीणों को अपने बच्चों की शादी की चिंता भी सताने लगी है। बीमारियों की वजह से यहाँ इनके रिश्ते भी जल्द नही हो पाते। अन्यत्र स्थान से यहाँ कोई अपनी बेटी भेजना तक नही चाहता।

ग्रामीणों ने बताई समस्याएं

यहाँ निवासी लक्षण दास 50 वर्ष ने बताया कि मुझे कई वर्षो से कमर दर्द व दाँत में सड़न की शिकायत बनी हुई है जो कि ठीक होने का नाम नही ले रही।डॉक्टरों को दिखाते हैं पर कोई आराम नही मिला स्थिति ज्यो की त्यों बनी हुई है।गाँव मे लगे हैडपम्प व कुंए के पानी को इस्तेमाल करते हैं जिसमे क्लोराईड की मात्रा होने से हमारी बीमारियां बनी हुई है।सरकार हमे इस बीमारी से मुक्ति दिलाने में मदद करे तो हमारी आने वाली नस्ले शायद बीमारियों से बच जाए।

ऐसे ही कई ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं साझा की जिसमे एक बुजुर्ग महिला जो कि समय से पूर्व ही कमर दर्द व अकड़न की शिकायत से ग्रसित होकर सालों से बिस्तर पर पड़ी हैं।ग्रामीणों ने बताया की यहाँ लगे हैडपम्प से निकलने वाले पानी के इस्तेमाल से हमारे दांतो में दर्द व सड़न बन जाती है।

ग्रामीणों से जब जनप्रतिनिधियों के विषय पर जानना चाहा तो इन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि तो न ही के बराबर आते हैं कई बार उन्हें इस समस्या के बारे में बताया गया है लेकिन हमे हर बार केवल आस्वाशन ही मिला है समस्याएं आज भी ज्यो की त्यों बनी हुई है।पूर्व में डॉक्टरों की टीम भी आई थी,पानी का सेम्पल भी लिया गया था लेकिन उसका भी कोई नतीजा सामने नही आया।

महुआपानी के सरपंच राजेन्द्र सिंह कवर से जब इस विषय पर चर्चा की गई तो सरपंच जी कुछ खास नही बता पाए,इन्होंने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए कदम उठाए जा रहे हैं पूर्व में कलेक्टर कार्यालय में ग्रामीणों संग पहुचकर मौखिक रूप से अवगत कराया गया था।पर अभी तक कोई सार्थक कदम गाँव के लिए नही उठाये गए हैं।इस बीमारी की वजह से ग्रामीणों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार की योजनाएं फेल

गांव महुआपानी अपने आप मे अछूता नजर आता है यहाँ सरकार की योजनाएं दूर दूर तक कही नजर नही आती ग्रामीणों को आवास योजना का लाभ तक नही मिल रहा है कच्चे टूटे फूटे घरों में निवास कर अपनी जीविका चलाने को मजबूर हैं।नलजल योजना का नामोनिशान नही है ग्रामीण क्लोराईड युक्त पानी पीकर बीमारियों की आगोश में समाते चले जा रहे हैं।बुजुर्गों को मिलने वाला पेंशन भी भगवान भरोसे ही है।दूरस्थ वनांचल छेत्र होने की वजह से यहाँ के ग्रामीणों का रहन सहन व समस्याएं सरकार के कानों तक नही पहुँच पाती और जनप्रतिनिधि इसका भरपूर लाभ उठाते है।सरकार को इस गाँव के  विकास व उत्थान के लिए अतिआवश्यक कदम उठाने चाहिए और क्लोराईड युक्त पानी से जल्द निजात दिलाया जाए ताकि ग्रामीणों को गम्भीर बीमारियों से छुटकारा मिल  सके।