Ganesh Chaturthi 2021 : पूजा अनुष्ठान, व्रत विधि, मंत्र और इस विशेष त्योहार के बारे में जानें

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गणेश चतुर्थी कल यानी 10 सितंबर को है. ये त्योहार जिसे ‘विनायक चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है, एक विशेष महत्व रखता है और पूरे भारत में एक भव्य उत्सव का प्रतीक है. जैसा कि नाम से पता चलता है, ये भगवान गणेश के सम्मान में मनाया जाता है-भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र भगवान गणेश जिनका जन्म इसी दिन हुआ था.
इसे ‘विनायक चविथी’ भी कहा जाता है, गणेश चतुर्थी भाद्र के महीने में मनाई जाती है जो आमतौर पर जॉर्जियाई कैलेंडर के अनुसार, अगस्त या सितंबर में आती है. इस साल ये त्योहार 10 सितंबर, 2021 को पड़ रहा है और इसके बाद 11 दिनों तक चलने वाला गणेश उत्सव होगा जहां भक्त भजन गाते हैं, प्रार्थना करते हैं और यहां तक ​​कि उपवास भी करते हैं.

गणेश चतुर्थी : पूजा और अनुष्ठान

– इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर अपने घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करते हैं.
– गणेश की नई मूर्ति को एक ऊंचे चबूतरे पर रख कर पूजा की जाती है.
– दस दिनों तक भक्ति के साथ अनुष्ठान किए जाते हैं.
– रोज भगवान गणेश की आरती की जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है.
– भगवान गणेश को मोदक बहुत प्रिय होने के कारण हर दिन मोदक और अन्य नैवेद्य चढ़ाए जाते हैं.
– प्रसाद सभी के बीच बांटा जाता है.
– जहां सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, वहां विशाल विस्तृत पंडाल सजाए जाते हैं.
– इन पंडालों में श्रद्धा और उत्साह के साथ लोग आते हैं.
– भगवान गणेश की दैनिक पूजा की जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है.
– दस दिनों के बाद विसर्जन जुलूस धूमधाम से निकाला जाता है.
लेकिन इस बार फिर कोरोना महामारी के कारण और कलेक्टर के गाइड लाइन के अनुसार भव्य आयोजन नहीं हो पाएंगे . गणेश चतुर्थी पर्व केवल शासन प्रशासन के नियमो के आधार पर कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे.

गणेश चतुर्थी : मंत्र

ऊं एकदंताय विधामहे, वक्रतुंडाय धिमही, तन्नो दंति प्रचोदयात्

ऊं वक्रतुंडायक नृत्यस्त्रय क्लिंग हिंग श्रृंग गण गणपतये वर वरदा सर्वजनं मे वाशमनय स्वाहा

वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभः निर्विघ्नम कुरुमेदेव सर्व कार्येषु सर्वदा

गणेश गायत्री मंत्र

ऊं एकदंताय विधामहे, वक्रतुंडाय धिमही, तन्नो दंति प्रचोदयात्

वक्रतुंड मंत्र

ऊं वक्रतुंडायक नृत्यस्त्रय क्लिंग हिंग श्रृंग गं गणपतये वर वरदा सर्वजनं मे वाशमनय स्वाहा

दैनिक गणपति मंत्र

ऊं गं गणपतये नमः

नाम के साथ गणेश मंत्र

-ऊं गणध्याक्षय नमः

-ऊं गजाननाय नमः

-ऊं विघ्नाशय नमः

-ऊं गजकर्णकाय नमः

-ऊं विकातय नमः

-ऊं विनायकाय नमः

ऋण हर्ता मंत्र

ऊं गणेश ऋणं छिंदी वरेण्यम हूं नमः फट

शक्तिविनायक मंत्र

ऊं ह्रीं ग्रीं ह्रीं

गणेश मूल मंत्र

ऊं श्रीं ह्रीं क्लें ग्लौम गं गणपतये वर वरद सर्वजन जनमय वाशमनये स्वाहा तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुंडाय धिमहि तन्नो दंति प्रचोदयत ओम शांति शांति शांतिः

नोट- यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.