कोरबा:-  125 नरवा में हो रहे संरक्षण-संवर्धन के काम भू-जल स्तर में बढ़ोत्तरी के साथ फसल उत्पादन में भी हो रही वृद्धि

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शासन की महत्वकांक्षी सुराजी गांव योजना अंतर्गत नरवा कार्यक्रम के तहत जिले में नालों के संरक्षण-संवर्धन का काम बखूबी किया जा रहा है। राज्य शासन के मंशानुरूप पुराने नालों का उपचार किया जा रहा है। नरवा के उपचार से भू-जल स्तर में वृद्धि हो रही है साथ ही अतिरिक्त सिंचाई क्षमता भी विकसित हो रही है। नरवा विकास के तहत पुराने नालों को पुनर्जीवित करने के विभिन्न प्रकार के कार्य भी किये जा रहे है। कोरबा जिले में 125 नरवा में संरक्षण-संवर्धन का काम किया जा रहा है। इन नरवों को उपचार कर सिंचाई सुविधा में विस्तार किया जा रहा है, साथ ही भूमि के जल स्तर में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। जिले में कुल 30 नरवा के कार्य पूरे कर लिए गए हैं। उपचारित किए गए नौ नरवा के उपचार के प्रभाव का आंकलन किया गया है। नरवा के उपचार से कैचमेंट एवं कमाण्ड एरिया का औसत भू-जल स्तर में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नरवा उपचार से सिंचित क्षेत्रफल में पांच प्रतिशत और फसल उत्पादन में पांच प्रतिशत की भी वृद्धि हुई है। नरवा में उपचार के काम से ग्रामीण क्षेत्रों में मृदा एवं जल का संरक्षण हो रहा है। नरवा कार्यक्रम के तहत नालों में ब्रशवुड, लूजबोल्डर, गलीप्लग, गेबियन, परकोलेशन टैंक, डाइकवाल, रिचार्ज पीट एवं फॉर्म बंडिंग के काम किये जा रहे हैं। यह सब काम स्थानीय नागरिकों को संलग्न करके किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।
जिला पंचायत सीईओ श्री कुंदन कुमार ने बताया कि जिले में राजस्व एवं वनक्षेत्र के अंतर्गत 125 नरवा का उपचार किया जा रहा है। इन सभी नरवा में दो हजार 992 कार्य कराये जा रहे हैं जिसमें से दो हजार 010 काम पूर्ण हो चुके हैं। नरवा में उपचार के 982 काम प्रगतिरत् हैं। उन्होंने बताया कि उपचारित नरवा की कुल लंबाई 909 किलोमीटर है तथा नरवा कैचमेंट एरिया एक लाख 99 हजार 385 हेक्टेयर है। नरवा कार्यक्रम के तहत वर्षा ऋतु के बाद सुख जाने वाले जनपद पंचायत पाली के ग्राम अलगीडांड से निकलने वाला हाथी नाला का उपचार किया गया। हाथी नाला उपचार के बाद नरवा में जल प्रवाह और मिट्टी का कटाव कम हुआ जिससे 12 हेक्टेयर में सिंचाई का रकबा बढ़ गया है। इसी प्रकार जनपद पंचायत कोरबा के ग्राम पंचायत कोरकोमा में रामनगर के तुर्री मंदिर से निकलने वाला कचांदी नाला का उपचार किया गया है। इस नाले में मनरेगा के तहत जल व मिट्टी संरक्षण की संरचनाएं बनाई गई। मनरेगा के द्वारा ब्रशवुड, लूजबोल्डर, गलीप्लग, डबरी तालाब का निर्माण करके नाला का उपचार किया। कचांदी नाले पर बनी विविध संरचनाओं से नाले में पानी भराव अधिक हुआ है। ग्रामीणों को नाले से सिंचाई सुविधा मिल रही है। कचांदी नाला उपचार से 18 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई सुविधाा की बढ़ोत्तरी हुई है। मनरेगा के माध्यम से बनाई गई जल संवर्धन संरचनाओं से 500 से अधिक ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है। इसी प्रकार गोखरू नाला में उपचार के कामों से 14 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई सुविधा की बढ़ोत्तरी हुई है।