एनटीपीसी प्रबंधन की मनमानी से भू विस्थापित परेशान, राखड़ बाँध के दलदल में फसकर काल के गाल में समा रहे मवेशी 

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एनटीपीसी प्लांट व राखड बाँध से क्षेत्र में हो रहा व्यापक प्रदुषण, क्षेत्रवासियों की शिकायत को प्रबंधन कर रहा दरकिनार  

 एनटीपीसी के भारी वाहनों ने रोड किया बर्बाद, डेम से निकलने वाले दूषित पानी और राखड़ से खेत और गाँव हो रहा बर्बाद

पूर्व भुविस्थापितों ने नियमित रूप से कार्य मे रखने को लेकर एनटीपीसी प्रबंधन को सौपा ज्ञापन

बिलासपुर| एनटीपीसी के राखड़ डैम के पानी के ओवरफ्लो होने से आसपास के गांवों में बरसात के दिनों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं. रात हो या दिन  तेज बारिश के बाद यहां लोगों के घरों में डैम विषैला  पानी घुस जाता है वही बारिश के दिनों में गांव सुखरीपाली,रलिया,कौड़िया, में ग्रामीणों के घर में पानी घुस जाता हैं, फसल अलग बर्बाद होता हैं,जिससे ग्रामीण और किसानों का जीवन अस्त-वयस्त हो जाता है| क्षेत्रवासियों ने इस मामले को लेकर एनटीपीसी प्रबंधन को कई बार शिकायते भी की मगर प्रबंधन द्वारा क्षेत्रवासियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है|

आज इंसान के जीवन की सबसे बड़ी मांग है घर, कुछ लोगों को जीवन भर खुद का घर नसीब नहीं होता कुछ लोगों का जीवन अपना एक अशियाना बनाने में गुजर जाता है. लेकिन जब बना बनाए आशियाने से मजबूर होकर आपको बाहर निकलाना पड़े तो आपको कैसा लगेगा, ठीक ऐसा ही हाल  एनटीपीसी प्रभावित ग्राम पंचायतों का हैं, एनटीपीसी स्थापन के पूर्व  लोगो का जन जीवन बहुत ही खुशहाल था. लेकिन सीपत स्थित एनटीपीसी के राखड़ डैम और वहां के निकलने वाले विषैले पानी ने इनका जीवन को बर्बाद कर रखा है. डैम के पानी के सीपेज होने से आसपास के गांवों में बरसात के दिनों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं| ज्ञात हो कि सीपत स्थित एनटीपीसी प्लांट प्रबंधन से पूर्व भुविस्थापितों ने नियमित रूप से कार्य मे रखने को लेकर ज्ञापन सौंपा, इस दौरान प्रबंधन के एचआर से नीरज सोनी व एमजीआर से आरके यादव भुविस्थापितों से चर्चा करने बाहर आए।  भुविस्थापितों ने अपने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि कुछ दिन पहले प्रबंधन द्वारा विज्ञापन जारी करने के बाद एक एकड़ से कम जमीन वाले कुछ भुविस्थापितों को एमजीआर विभाग के अंतर्गत तारपोलिंग में कार्य करने रखा गया है। जिसमें 23 दिन ड्यूटी मिलता था लेकिन अचानक उसे कम करके प्रबंधन द्वारा 15 दिन कर दिया गया। जिससे उनका गुजारा व परिवार का जीवनयापन करना मुश्किल हो गया है।  पूर्व भुविस्थापितों ने बताया है कि कई भुविस्थापित अन्य जगहों पर कर रहे काम को छोड़कर उम्मीद लेकर यहां आए है उसके बावजूद भी इस तरह का हरकत किया जाना समझ से परे है। बता दें कि एक ओर इनको 20 वर्षों के बाद ठेका श्रमिक के अंतर्गत सीमित समय के लिए काम मे रखा गया है ऊपर से ड्यूटी काटकर 15 दिन कर दी गई। आक्रोशित भुविस्थापितों ने ज्ञापन के माध्यम से तारपोलिंग ग्रुप में बाहरी व्यक्तियों को पैसा लेकर कार्य मे रखने व हाजरी कम कर बाहरी व्यक्तियों का हाजरी बढ़ाने का साफ आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके साथ तारपोलिंग के अलावा अन्य कार्य भी कराकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। भुविस्थापितों ने बताया कि उन्हें काम करना है तो करो नही तो काम छोड़ने व गेट पास छीनने की धमकी भी दी जाती है। प्रबंधन के इस निर्णय से लगभग 20 गांव के 150 व्यक्तियों के परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है । इन्होंने प्रबंधन से विभाग में नियमित रूप से रखकर 26 दिन की हाजरी व स्थानीय भुविस्थापितों को इंचार्ज व सुपरवाइजर चयन करने की मांग की है। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने 7 दिवस के अंदर मांगे पूरी नही होने पर रेल रोको आंदोलन करने बाध्य होने की प्रबंधन को चेतावनी दी है जिसका जिम्मेदार प्रबंधन स्वयं होगा। इस विषय पर प्रबंधन ने जल्द ही विचार विमर्श कर रास्ता निकालने की बात कही है। ज्ञापन सौंपने वालों में दुर्गेश साहू गेंदराम मेलाराम योगेश पटेल दिलीप यादव गणेश बंजारे अमर राठौर अभिमन्यु चंद्राकर मधुसूदन साहू कमलेश चैतराम सहित ग्राम धनिया देवरी पिपरानार कौड़िया पंधी खैरा बिटकुला मड़ई लुतरा  दवनडीह खांडा दर्राभांठा गतौरा आमानारा निरतु कुकदा उसलापुर  कौवाताल के भुविस्थापित उपस्थित रहे।

राखड डेम से उड़ने वाले धुल से क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित :- एनटीपीसी सीपत द्वारा बिजली उत्पादन के दौरान निकले राखड़ को आसपास के गांव के निकट बनाए गए राखड़ डेम में डाला जाता है जो तेज हवाओं के चलने पर उड़ उड़ कर लोगो के घरों तक पहुँच रहा है जिससे खाना, पानी और वातावरण प्रदूषित हो रहा है सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि पीने के पानी में भी राखड़ घुल कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है तो वहीं कृषि भूमि बंजर होती जा रही है। ग्रामीणों की मानें तो उनका जीना मुश्किल हो गया है। पिछले कई साल से लगातार शिकायत कर रहे हैं लेकिन जिम्मेदार प्रशासन कुभकर्णीय नींद से जागता ही नहीं! एनटीपीसी के जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों की सुनते नहीं, तहसीलदार,SDM, कलेक्टर, और पर्यावरण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं करते। एनटीपीसी सीपत के द्वारा ग्राम रलिया, सुखरीपाली, भिलाई,हरदाडीह में राखड़ डेम बनाया गया है गर्मी का मौसम आते ही तेज हवाओं के चलने से राखड़ डेम से बड़ी मात्रा में राखड़ उड़ कर आस पास स्थापित गांव के घरों तक पहुंच जाता और गांवो के लोगो के भोजन, पानी और जीवन को प्रभावित कर देता है। ग्रामीणों की माने तो उनके घरों में डेम से उड़कर आए राखड़ की मोटी परत चढ़ जाती है वही खाने के समान,पीने के पानी और कपड़ो में डस्ट जमा हो जाता है जो आस पास के 10 K.M.तक के एरिया को प्रभावित करता है हवा में राखड़ इतनी ज्यादा मात्रा में रहता है कि दूर दूर तक कुछ ठीक से दिखलाई नहीं देता रोड में चलने वाली गाड़िया तक नही दिखती और एक्सीडेंट होने का खतरा बना रहता है। ग्रामीण इसे राखड़ की आंधी तूफान मानते हैं गर्मी का समय एनटीपीसी के राखड़ डेम ग्रामीणों लिए अभिश्राप बन कर आता है। एनटीपीसी की लापरवाही से प्रतिदिन हजारों ग्रामीणों के स्वास्थ से खिड़वाड हो रहा है साथ ही पर्यावरण को भारी नुकसान पहुचाया जा रहा है लेकिन अब तक पर्यावण विभाग की उदासीनता से इन पर कोई कार्यवाही नही हो पाया है और न ही राखड़ डेम प्रबंधन के द्वारा कोई उचित व्यवस्था किया गया है। देखना होगा कि कब तक ग्रामीणों को राखड़ की आंधी और तूफान से निजात दिलाने जिला प्रशासन द्वारा निजात दिलाने कोई ठोस कदम उठाया जाता है!