महत्ती योजनाओं पर पलीता लगाते वनविभाग मरवाही के अधिकारी, कैम्पा योजना की राशि चढ़ी अधिकारियों और ठेकेदारों की भेंट

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मरवाही:::- मरवाही वनमण्डल अपने भ्रष्टाचार के लिए ख्याति प्राप्त है जहाँ पिछले 8 सालों से रेंजर वर्तमान में एसडीओ पेण्ड्रा लगातार बनों को चारागाह की तरह चर रहे हैं न तो इन्हें शासन का भय है ना ही प्रशासन का खुलेआम , जंगलों को तबाह कर अपनी जेब भरने में मस्त है ऐसा नहीं है कि इनके काले कारनामो शिकायत नहीं की गई शिकायत तो की जाती है मगर इस अधिकारी के रसूख के आगे पूरा वन अमला एवं शासन नतमस्तक हैं 

हम बात कर रहे है मरवाही वनमंडल की जहाँ बीते 8 सालों से एक रेंजर पहले मरवाही रेंज में रहकर मरवाही रेंज को चारागाह की तरह चरकर पूरे भक्षक की तरह लील रहे है जबकि इनके कारनामों के किस्से जगजाहिर है और वनअमले में बैठे उच्चाधिकारियों को इस रेंजर के कार्यकाल की जांच कराई जानी चाहिए थी किंतु ऐसा न कर उक्त अधिकारी को प्रमोशन देकर उनकी ताजपोशी कर रहे हैं और उन्हें एसडीओ बना दिया जाता है एसडीओ बनने के बाद भी यह अधिकारी अभी भी अप्रत्यक्ष रूप से मरवाही रेंज में रेंजरी कर रहे है !

उल्लेखनीय है कि वैश्विक कोरोना काल का समय मे सभी निर्माण कार्यों एवं विकास कार्यों पर जिसमे सेंट्रलविस्टा पर केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार ने विधानसभा भवन एवं मंत्रालय के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दिया है परंतु मरवाही वनमंडल अंतर्गत मरवाही वनपरिक्षेत्र में वन अधिकारी ठेकेदारों से मिलीभगत कर 40 से 50 जेसीबी लगाकर ग्राम चुवाबहरा , सचराटोला सल्हेकोटा , नाका एवं रूमगा में करोडो के तालाब एवं मिट्टी बांध निर्माण कार्य अपने निजी लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से करवा रहे है। 

यद्दपि ऐसे कार्यों का मूल उद्देश्य मजदूरों को रोजी उपलब्ध कराना है जिससे ग्रामीण मजदूर पलायन ना करे ...वही इन मजदूरों का पलायन भी पोल खोल कर रख दे रहा है.. लेकिन इसके भी मजदूरों के पेट में लात मारते हुए बाद भी जेसीबी मशीन द्वारा निर्माण कार्य धड़ल्ले से चालू है ..वही मरवाही रेंजर की बात करे तो बुद्धजीवियों का बोलना है की एक आदिवासी भोले भाले डिप्टी रेंजर को सुनियोजित तरीके से मरवाही वनपरिक्षेत्र का प्रभार दिलाकर बली का बकरा बनाया जा रहा है। 

मरवाही वनमंडल के मरवाही वनपरिक्षेत्र में पिछले 2 सालों में तालाब मिट्टी बांध , स्टॉप डेम एवं एनीकट निर्माण की सूक्ष्मता से जांच कराई जाए तो यह सामने आएगा कि जितना जंगल और जंगली जानवरों की संख्या वनपरिक्षेत्र में नहीं है उससे कही ज्यादा तालाब ए एवं एनीकट का निर्माण कराये जा चुका है  चूंकि तालाब निर्माण के कार्यों में कैम्पा योजनांतर्गत करोडो की स्वीकृति मिली है।

इसलिए अधिकारी ठेकेदारों से मिलीभगत कर दिन और पूरी पूरी रात कार्य करवाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे है उक्त अधिकारी 8 सालो से एक ही जगह पर जमे है जबकि शासन की नियमावली अनुसार ऐसे अधिकारी का 3 साल में स्थानांतरित कराया जाना सुनिश्चित मगर यह अधिकारी कई सालों से यही रेंजर एसडीओ और डीएफओ बनने का भी ख्वाब देख रहे हैं।

ताकि यह अपने पुराने काले कारनामो पर लीपापोती कर सके क्या शासन में बैठे लोगों को यह दिखाई नहीं देता को मरवाही वनमंडल को ही अलग से नियम कायदे बनाकर विशेष प्राथमिकता के रूप में जेसीबी मशीन द्वारा अधिकारियों एवं ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने की दृष्टि से ऐसा कार्य करवाया जा रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मरवाही वनपरिक्षेत्र अधिकारी कोरोना की चपेट में आने के कारण पिछले डेढ़ माह से बिलासपुर के निजी अस्पताल भर्ती होकर अपना इलाज करवा रहे है 

किंतु बिना रेंज अफ्सर के मरवाही के जंगलों में करोडो का कार्य किसके मार्गदर्शन एवं निर्देशन में कराया जा रहा है इससे ऐसा प्रतीत होता है। कि सरकार से जुड़ प्रभावशाली लोगों का पूरा संरक्षण प्राप्त होने के कारण वन विभाग के अधिकारी निर्भीकता से रेंजर की अनुपस्थिति में कार्य को अंजाम दे रहे है यह कार्य गुणवत्ताहीन अथवा घटिया निर्माण होने की स्थिति में इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा या फिर कोरोना रहे अस्पताल में भर्ती रेंज अफ्सर को दोषी ठहरा दिया जावेगा। 

आम जनमानस यह चर्चा है कि सीधे साधे ए भोले भाले आदिवासी डिप्टी रेंजर को वरिष्ठ वन अधिकारियों द्वारा अपने निजी लाभ अर्जित करने के लिए जानबूझकर
खुलेआम मरवाही वनमंडल को वीरान किया जा रहा है इसके बाद भी शासन आंख मूंद कर ऐसे अधिकारी को संरक्षण देना यह बताता है कि ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारी सब मिले हुए गंभीर मामले में जब जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से बात की गई तो उन्होंने बताया कि रोजगार मुलक के कार्यों में इस तरह मशीनों का उपयोग करना गलत है।

जबकि कार्य मजदूरों से कराया जाता तो मरवाही आदिवासी अंचल के ग्रामीणों को गांव में रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता था मगर मजदूरों पेट मे मारते मशीनों का उपयोग किया जा रहा है यह नियमतः पूरी तरह है गलत है उक्त मामले में तत्काल रोक लगाकर जांच कराया जाना चाहिए वही विपक्ष भी उक्त मामले को गंभीरता से लिया और मानसून सत्र में विधानसभा में उक्त गंभीर मामलों को उठाये जाने की बात कह रही है देखने वाली बात है।

कि बार बार समाचार पत्र के प्रकाशन के बाद भी शासन कुम्भकरण की निद्रा से जागती है या इसी तरह से इसी इन भ्रष्ट अधिकारियों को भ्रष्टाचार का खुला खेल जारी रहता है।