महत्ती योजनाओं पर पलीता लगाते वनमंडल कटघोरा के अधिकारी, कैम्पा योजना की राशि चढ़ी अधिकारियों और ठेकेदारों की भेंट

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रितेश गुप्ता: कटघोरा वन मंडल विभाग में टेंडर घोटाला . सभी टेंडरों को निरस्त कर अब बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की तैयारी 

कोरबा::- प्रदेश के बेरोजगार इंजीनियरों की चिंता करते हुए शासन ने उनके लिए काम की व्यवस्था कर रही और दूसरी ओर वन विभाग के अधिकारी इसमें भी अपना निजी फायदा ढूंढ रहे। इंजीनियरों को जारी टेंडर को निरस्त कर अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप वन विभाग के अधिकारियों पर लगाया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेरोजगार इंजीनियरों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण योजना दी है। इधर वनमंडल कटघोरा के अधिकारी उसमें पलीता लगाने कोई कसर नहीं छोड रहे।

ताजा मामला कटघोरा वन मण्डल विभाग का सामने आया है। कटघोरा वन मण्डल के पसान वन परिक्षेत्र में कैंपा मद के तहत के तहत कलेवा नाला व गोलवा नाला पर बनने वाले स्टॉप डेम का टेंडर गलत तरीके से निरस्त कर दिया गया। नियमो को ताक पर रख कर चहेतों ठेकेदारों को शासकीय अधिकारी किस तरह से फायदा पहुंचाते है? इसका नजारा कटघोरा वन मंडल में आसानी से देखा जा सकता है... कटघोरा वनमंडल में पदस्थ अधिकारियों ने इंजीनियर को आबंटित टेंडर को निरस्त कर अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए स्टॉप डेम कार्य दिखावे के लिए विभागीय करने हेतु टेंडर जारी कर दिया,।। वही गौरतलब है कि शासन के आदेशानुसार बेरोजगार इंजीनियरों को रोजगार देने निर्देश दिए है लिहाजा टेंडर बेरोजगार इंजीनियरों को दिया गया था।

वही  बेरोजगार इंजीनियरों ने दो बार टेंडर डाला। टेंडर संबंधित प्रक्रिया करने में  प्रति इंजिनियरों का लगभग 25 से 30 हजार रुपए खर्च हुए है..लेकिन निरस्त होने के कारण उनके पैसे डूब गए। ऐसे में अब उन्हे टेंडर डालने के लिए दोबारा सोचना पड़ेगा।

वही मामले में मुख्यालय के  अधिकारियों से चर्चा करने की बात कहते हुए कटघोरा वन मंडल के अफसर पल्ला झाड़ रहे है।
जिन इंजिनियरो का यह टेंडर निरस्त हुआ, उसने अफसरों पर अपने चेहते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अपील याचिका करने की बात की है ।