पखांजूर :-  पखांजूर वन विभाग द्वारा बाघ खाल पकड़ने की कार्यवाही

 | 
1

पखांजूर वन विभाग द्वारा बाघ खाल पकड़ने की कार्यवाही अब विवादों में फंसती जा रही है। आरोप है की विभाग ने मुख्य आरोपी को छोड़ दिया और सहायकों को मुख्य आरोपी बना जेल भेज दिया है। वहीं विभाग इन आरोपों को सिरे से नकार रहा है। और जिनकी फोटो पहले आई थी उसे मुखबीर बता रहा है।

 गुरूवार की शाम वन विभाग द्वारा बाघ की खाल के साथ दो आरोपियों को भी रंगे हाथ  पकड़ा था। दोनों आरोपी में से एक पीव्ही 64 निवासी रतन पाईक तथा एक ग्राम घोड़ागांव निवासी गज्जू नेताम था।  यह कार्यवाही प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी को मिली सूचना के आधार पर की गई थी। और मुखबीर से ले इन्हें पकड़ने आया पूरा दल बाहर से ही आया था। पर पूरी कार्यवाही उस समय विवादों में आ गई जब पहले आए विडियों में दिख रहा एक आरोपी  आैर सुबह मिडिया के समझ जब आरोपियों को प्रस्तुत किया गया तो उनमें से एक आरोपी बदल गया।
 यह कार्यवाही प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी को मिली सूचना के आधार पर की गई थी। पर पूरी कार्यवाही उस समय विवादों में आ गई जब पहले आए विडियों में एक आरोपी कोई आैर था पर सुबह मिडिया के समझ आरोपियों को प्रस्तुत किया गया तो उनमें से एक आरोपी बदल गया। डीएफओ भानु पश्चिम आर सी मेश्राम ने बताया कार्रवाई के लिए आया दल और मुखबिर भी बाहर से आए हुए थे स्पष्ट है कि मुखबिर को दल अच्छी तरह पहचानता था ऐसे में इन दलों के सदस्यों के साथ आरोपियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा था

 मुख्य आरोपी बदलने की घटना को इस लिए भी बल मिलता है कि  विभाग जिसे मुख्य आरोपी बता रहा है उसके पास से कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही। विभाग ने यह पूरी कार्यवाही कर दी पर न मुख्य आरोपी यह बता पा रहे की खाल माड़ क्षेत्र से किस गांव किस आदमी से कितने में खरीदी गई  इसका जबाव न आरोपियों के पास है और न ही विभाग के पास इसके अलावा पकड़े गए दो आरोपी साथ में तीन और लोगों के होने की बात कह रहे है जिसमें से दो स्थानिय तथा एक उड़ीसा का है। और सौदे की रकम इन पांचों में बटने की बात बताई थी पर विभाग की कार्यवाही में तीनों का कोई रता पता तक नहीं है
 इस पूरी विवाद की मुख्य वजह सोशल मीडिया में आया वीडियो है जिसे किसी वन विभाग के कर्मचारी द्वारा ही रेस्ट हाउस में रायपुर से आए दल द्वारा कार्रवाई के दौरान बनाया गया है। रात करीब 10:00 बजे है वीडियो सोशल मीडिया में आया जिसमें बताया गया कि 2 आरोपियों के बाघ की खाल के साथ पकड़ा गया है यह वीडियो मां टोली स्थित वन विभाग के रेस्ट हाउस में ही बनाया गया है पर आरोपियों को पकड़ा गया था इसकी पुष्टि भी वन विभाग के अधिकारी यह बता कर रहे हैं कि या तो मुखबिर है । ऐसे में इस वीडियो की सत्यता को नकारा नहीं जा सकता इस संबंध में डीएफओ पश्चिम भानु आर सी मेश्राम ने बताया कार्यवाही के लिए मुखबिर और दल दोनों रायपुर से आए थे स्थानीय अधिकारियों का कोई सहयोग नहीं दिया गया वर्तमान में स्थानीय अधिकारी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं अगर ऐसी कोई बात आएगी तो  कार्रवाई होगी।