पखांजूर :-  कांति नाग की अध्यक्षता में बुद्धिजीवियों संग संपन्न हुई शिक्षा एवं संस्कृति पर परिचर्चा

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आज राज्य योजना आयोग की शिक्षा एवं संस्कृति विकास की सदस्य कांति देवी नाग की अध्यक्षता में आयोजित अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में शिक्षा एवं संस्कृति के संरक्षण संवर्धन पर परिचर्चा बुद्धिजीवियों और अनुसूचित जनजाति के प्रमुखों के संग संपन्न हुई ।

इस परिचर्चा के दौरान श्रीमती कांति देवी नाग ने सभी बुद्धिजीवियों और अनुसूचित जनजाति समूह के समाज प्रमुखों को अपने अपने विचार और अपने अपने सुझावों को मौखिक एवं लिखित माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर दिया ।

इस दौरान समाज के बुद्धिजीवियों और समाज प्रमुखों ने अपने अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए ।

इनमे से मुख्यता शिक्षा में उत्थान के लिए अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के बच्चो को शिक्षित बनाने के लिए शासन के द्वारा स्कूल के साथ साथ ट्यूशन भत्ता, अति पिछड़े इलाको के बच्चो को यात्रा भत्ता, उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए शासन से मदद, मेधावी छात्र छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए शासन द्वारा प्रोत्साहन देने जैसे 100 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए ।

इन सभी महत्पूर्ण सुझावों के बाद श्रीमती कांति देवी नाग ने कहा की मैं अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में शिक्षा के उत्थान के लिए आप सभी से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों और उपायों को मैं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं योजना आयोग छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष राजेश तिवारी के समक्ष प्रस्तुत कर पूरी ईमानदारी से अमल करने का प्रयास करूंगी ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी शिक्षित होकर स्वलंबित बने और अनुसूचित जनजाति के बच्चो को देश ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त हो ।

इन सभी के पश्चात श्रीमती कांति देवी नाग ने आज के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में शिक्षा एवं संस्कृति के संरक्षण संवर्धन पर परिचर्चा में सम्मिलित होकर अपना बहुमूल्य सुझाव समाज हित में प्रस्तुत करने के लिए सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए सभी को सम्मान पत्र प्रदान किए ।

इस परिचर्चा के दौरा प्रमुख रूप से अंतागढ़ विधायक अनूप नाग, शेर सिंह आंचला, आर.एन. ध्रुव, कृष्णपाल राणा, बद्रीनाथ गावड़े, विश्राम गावड़े, वीर सिंह उसेंडी, सोहन हिचामी, दामेसाय बघेल, अशोक ओरसा, वेदप्रकाश मंडावी, संध्या कौडो, मुकेश उसेंडी, चंद्र कुमार ध्रुव, हीरालाल मांझी, सुगदू पोटाई, सुखरंजन उसेंडी, राजाराम कोमरे, सतीश टेकाम, सुखलाल नवगो, रूपेश ठाकुर, राधेलाल नूरेटी समेत समाज के सभी प्रमुख एवं बुद्धिजीवी वर्ग मौजूद रहे ।