पखांजुर :-  राज्य योजना आयोग की सदस्य कांति नाग ने जताया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजेश तिवारी का आभार

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गोंडी, हल्बी समेत अन्य कई स्थानीय भाषाओं को स्कूली शिक्षा में मान्यता देने के लिए जताया आभार

प्रदेश में पहली से पांचवीं तक के स्कूली बच्चे अब स्थानीय भाषा और बोली में पढ़ाई कर सकेंगे ।

इनमें स्कूल शिक्षा विभाग ने गोंडी, हल्बी, कुडुख, सादरी, भतरी, सरगुजिहा जैसे अन्य कई स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई के लिए पुस्तके और पठन सामग्री तैयार करवाई है ।

विगत दिनों राज्य योजना आयोग की जनजातीय समूह की शिक्षा एवं संस्कृति की सदस्य कांति देवी नाग की अध्यक्षता में अंतागढ़ में बुद्धिजीवियों संग अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में शिक्षा के उत्थान के संबंध में परिचर्चा आयोजित की गई थी ।

जिसमें समाज के बुद्धिजीवियों, समाज प्रमुखों ने स्थानीय भाषाओं जैसे गोंडी और हल्बी में बच्चो की पढ़ाई शुरू करने की प्रमुखता से एक स्वर में मांग उठाते हुए श्रीमती नाग के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए थे ।

जिसके अगले ही दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग ने गोंडी, हल्बी समेत अन्य कई स्थानीय भाषाओं में बच्चो की पढ़ाई पर मुहर लगाकर आगे की कार्यवाही प्रारंभ कर दी ।

अनुसूचित जनजाति की इस मांग को पूर्ण होते ही राज्य योजना आयोग की शिक्षा एवं संस्कृति की सदस्य कांति देवी नाग ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी को धन्यवाद ज्ञापित किया है ।

श्रीमती कांति नाग ने कहा मैं हर्षित हूं प्रसंशित हूं क्योंकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का यह निर्णय ऐतिहासिक है यह निर्णय गोंडवाना समाज, हल्बा समाज के आने वाली पीढ़ी के लिए एक वरदान साबित होगा । साथ ही गोंडवाना समाज और हल्बा समाज मुख्यमंत्री का आभारी है ।