रायगढ़ :-  निचले स्तर के वनकर्मी के निलंबन बाद, ऊपरी सतह पर तैरने लगे सवाल

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धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत हांथी और इंसान के बीच द्वंद का सिलसिला लगातार जारी है पूरा वनमंडल एक तरह से हांथीमय है हांथी से इंसानी मौत का आंकड़ा काफी ऊंचाइयों पर है तो वहीं हांथियों की मौत का आंकड़ा भी कम नही है एक जानकारी मुताबिक धरमजयगढ़ वनमंडल में 2005 से अबतक करीब 48 हांथियों की मौत हो चुकी है वहीं हांथी हमले से इंसानी मौत का आंकड़ा सैकड़ा पार कर गया है बता दें मृत 48 हांथियों में से लगभग 23 हांथियों की मौत बिजली करंट से होना बताया गया है 23 हांथियों की करंट से मौत के मामले में अमूमन देखा गया है जमीन मालिक किसानों के ऊपर कार्यवाई हुई है लेकिन संबंधित फोरेस्टगार्ड पर एक या दो अपवाद छोड़ दें तो कहीं और ऊंचे पद पर विराजे अधिकारियों द्वारा किसी तरह की कार्यवाई नही देखी गई है मसलन मेंढरमार गांव में बिजली करंट से हाथी की मौत,चुहकी मार में करंट से मौत, ढाली बस्ती क्षेत्र में एक साथ दो हांथी की करंट से मौत,बेहरामार में करंट से मौत,सारसमार में बिजली करंट से मौत,इस तरह हाथी की बिजली करंट से मौत का फेहरिस्त करीब 23 हांथी के आंकड़ों पर जाकर रुकता है तो सवाल उठता है पोटिया फारेस्ट गार्ड सतकुमार चौहान पर कार्यवाई की गाज जितनी तेज गति से गिरी है उससे वन विभाग के मुख्य अंग माने जाने वाले वनकर्मीयों के जहन में कई अनसुलझे सवाल उपजने लगे हैं निलंबन कार्यवाई बाद जिम्मेदार अफसर के प्रति अंदरूनी रूप से लोगों की राय है विभाग अपनी नाकामी को निलंबन नामक चादर से ढकने का प्रयास की हैं जिसे समझना ज्यादा कठिन नही है।

हाथी की मौत के मामले में जेल दाखिल नेतराम ने स्वीकार किया है फसल को हाथी से बचाने डीसी करंट लगाया था लेकिन खराब होने पर केवल उसी एक रात को तार में हाईवोल्टेज टच किया था ।विभाग के आला पोस्ट में आसीन अधिकारियों से लेकर पूरे वनविभाग के मुख्य अंग निचले स्तर के वनकर्मीयों को माना जाता है जमीनी स्तर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठापूर्वक करने सफल प्रयासरत रहते हैं मेहनत कश ये वही अंग हैं जो विभाग को कहीं न कहीं चलाने में अहम भूमिका अदा करते हैं लेकिन वहीं बता दें जानकारी अनुसार पोटिया लेकिन पोटिया जैसे घटनाक्रम के बाद बड़ी आसानी से विभाग के शिखर में विराजे जिम्मेदार निलंबन नामक हथियार का इस्तेमाल कर शेष निष्क्रिय शरीर का बचाव बड़ी आसानी कर लेते हैं ।
याद दिला दे, 21 अगस्त को पोटिया विट के 427 आर एफ जंगल के स्थानीय क्षेत्र धुरसा जंगल मे बिजली करंट से हुई हाथी के मौत के मामले में आलाधिकारियों द्वारा तेज कार्यवाई करते हुए फारेस्ट गॉड सतकुमार चौहान को निलंबित कर दिया गया। यही कार्यवाई और अन्य जगहों पर जहाँ करंट से हाथी की मौत हुई वहाँ इस तरह की तेजी नही देखी गई ? यह सवाल अपने आप मे बहुत सी बातों को साफ कर रहा है कार्यवाई के अनुरूप अगर फारेस्ट गॉड से कर्तव्य के प्रति चूक हुई है तो कहीं न कहीं संबंधित अधिकारीयों की भी चूक मानी जा सकती है घटना वाली रात बताया जा रहा है अधिकतर अधिकारी कर्मचारी रक्षा बंधन त्योहार में थे वहीं परिक्षेत्र सहायक धरमजयगढ़ पूर्व सहायक की बात करें तो वे सुबह करीब 1 बजे घटना स्थल पहुंच सके,एक आंख में काजल,एक आंख में शूरमा,की तर्ज पर हुई कार्यवाई कहावत को चरितार्थ कर रही है लिहाजा हाथी की मौत से जुड़ी तमाम बातें बड़े पद पर आसीन अधिकारीयों को कहीं न कहीं सवालों के कटघरे में खड़ा कर रहा है।