रायगढ़: कलेक्टर ने 11 करोड़ के घोटाले की फाइल खुलवाई, कांग्रेस और भाजपा के ठेकेदारों के चेहरों पर आया पसीना

टॉयलेट घोटाले ने उड़ाई नींद, 30 ठेकेदारों ने किया था काम
कलेक्टर ने फिर से खुलवाई फाइल तो कईयों के चेहरों पर आया पसीना, गिरोह की तरह लूटा स्वच्छ भारत मिशन का पैसा, कहीं बिना निर्माण के निकाली राशि तो कहीं मनमाने तरीके से बांटा काम

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रायगढ़ नगर निगम का टॉयलेट घोटाला तीन साल पहले सुर्खियों में रहा था। घोटाला ऐसा था कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेता बचाव की मुद्रा में आ गए थे। भारी दबाव में जांच तो हुई लेकिन कार्रवाई को रोक लिया गया। अब कलेक्टर ने 11 करोड़ के घोटाले की फाइल खुलवाई तो जिमेदारों की नींद उड़ गई है। ऐसा बहुत कम होता है जब किसी घोटाले में प्रमुख राजनीतिक पार्टियां, भाजपा और कांग्रेस दोनों की मिलीभगत ना हो। नगर निगम रायगढ़ में टॉयलेट घोटाला कुछ ऐसा ही था। शौचालय विहीन मकानों टॉयलेट बनाने के लिए सरकार की ओर से 18 हजार रुपए और हितग्राही की ओर से दो हजार रुपए सहयोग लिया जाना था। टेंडर के लिए जो नियम बनाए गए थे वे बहुत स्पष्ट थे।

30 ठेकेदारों व फर्म को काम सौंपा गया। लेकिन शिकायत आने पर पहले पार्षदों के एक दल ने स्वयं जांच की। घपला सामने आने के बाद विस्तृत जांच की मांग हुई थी। तत्कालीन कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ से जांच करवाई। रिपोर्ट अब तक धूल खा रही थी। कलेक्टर भीम सिंह ने घोटाले में शामिल लोगों के नाम और गड़बड़ी की जानकारी मांगी तो सबके कान खड़े हो गए।

 जब पुरानी जांच रिपोर्ट टटोली गई तो ऊपर से नीचे तक सारे घोटालेबाज बेपर्दा हो गए। अब उन पर कार्रवाई होनी बाकी है। जांच रिपोर्ट से पता चला कि तीन तरह से गड़बड़ी की गई। पहला निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दूसरा बिना निर्माण के राशि आहरित कर ली गई। जियो टैगिंग भी नहीं की गई। वर्क ऑर्डर में वार्ड का नाम ही नहीं था। सब इंजीनियर को भी नहीं मालूम था कि कहां कौन काम कर रहा है। इस घोटाले की फाइल दोबारा ओपन होने पर अब ठेकेदार, निगम के कुछ कर्मचारी, कई नेता असहज हो गए हैं।

11 करोड़ का है हुआ है भुगतान निगम के ओडीएफ घोटाले की परत दर परत उधेडऩे वाली जांच रिपोर्ट देखकर अफसर हैरान हैं। तत्कालीन निगम आयुक्त की मिलीभगत से रसूखदार नेताओं ने अपने खास लोगों को ठेके दिलाए। पेमेंट के पहले यह भी नहीं देखा गया कि काम पूरा हुआ या नहीं। जांच के दौरान भी निगम कमिश्नर ने सिर्फ 30 ठेकेदारों की लिस्ट व 48 वार्डों के हितग्राहियों की सूची ही दी थी। वर्क ऑर्डर की कॉपी लेने के लिए भी जांच टीम को मशक्कत करनी पड़ी। कई ठेकेदारों के तो वर्क ऑर्डर ही नहीं मिले। 30 ठेकेदारों को 6465 शौचालय के ठेके दिए गए। इसके लिए करीब 11 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

एफआईआर भी दर्ज होगी घोटाले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की जानकारी कलेक्टर ने मंगवाई है। बताया जा रहा है कि भौतिक सत्यापन में जिस तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं, उससे हर कोई हैरान है। इतनी गड़बड़ी मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। ठेकेदारों में भाजपा-कांग्रेस दोनों के लोग हैं। 

आने वाले दिनों में कोई बड़ी कार्रवाई हो सकती है। ठेकेदार का नाम- 

संजय अग्रवाल 1126
जय किशन अग्रवाल 819
फास्टेक कंप्यूटर 545
एसआर कंपनी 498
विराट कंस्ट्र-शन 307
अजय शर्मा-328
फिरत जायसवाल-300
जनक्षेम संस्था-270
पीपुल्स वेलफेयर-267
अनिल डालमिया-235
राजेश गुप्ता-225
रितेश कुमार पांडे-249
विजय सिंघानिया-226
प्रदीप मिश्रा-150
सूरज जायसवाल-115
मो. अली अशरफ-100
दलित डेवलपमेंट-96
धनंजय पटेल-97
कमल अग्रवाल-50
मनीष अग्रवाल-50
निश्चय समिति-20
ओम कंस्ट्र-शन 50
राधेश्याम अग्रवाल-31
रितेश कुमार वैद्य-74
सत्येंद्र नारायण सिंह-50
शारदा सिंह राजपूत-72
शौर्य कंस्ट्र-शन 43
विकास प्रभात समिति-31
ब्राइटल हाउस-21
दलित सर्वोन्मुखी-20


कलेक्टर ने ओडीएफ घोटाले में शामिल लोगों की जानकारी मांगी थी। जांच रिपोर्ट के अवलोकन के बाद दोबारा जांच भी की जा सकती है। सीधा-सीधा गबन का मामला है। एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है- आशुतोष पांडे, कमिश्नर, नगर निगम

रिपोर्ट- लक्ष्मण वैष्णव