रायगढ़ :-   बीईओ बरमकेला के आदेश का खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है प्रधानपाठक द्वारा

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वर्तमान समय में पुरे विश्व के साथ ही साथ हमारा देश भी कोरोना वायरस नामक महामारी की आगोश से बचते हुए आज यहां आम आदमियों में जीने की उम्मीद सी जगी है इसलिए अब धीरे धीरे शासकीय कार्यालय के साथ स्कूल कॉलेज भी संचालित किया जा रहा है इसी तारतम्य में आज भी एक मामला सामने आया है जिसमें प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के लिखीत आदेश भी नहीं मान रहे हैं और पीड़ीत महिला को भटकना पड़ रहा है। शिक्षको महतारी दुलार योजना के तहत लाभान्वित बच्चे की संख्यात्मक जानकारी,एवं गणवेश एवं पाठ्यपुस्तक किसी भी प्रकार की जानकारी न देकर पत्रकारों एवं विभागीय कर्मचारी पर भी व्यवहार खराब रहता है।
आइए जानते हैं क्या है मामला…..
यह मामला एक अबला नारी की है जो अपने पति पत्नि के आपसी विवाद के कारण अलग अलग रहकर जीवन यापन कर रहे हैं लेकिन तीन बच्चे हैं जिसमें एक लड़का नाबालिग है जो अपने पिता के साथ ग्राम बहलीडीह में रहता है और दो नाबालिग लड़की अपने माता के साथ सुखापाली(बच्चों की मामा गांव) में रहते हैं इस बीच दोनों पति पत्नी के बीच एकाएक और दूरियां बढ़ती गई और वर्तमान समय में स्कूल संचालित हो रही है इसलिए लड़की की माता ने विगत वर्षों से पड़ रही शासकीय प्राथमिक शाला बहलीडिह के प्रधान पाठक से फोन पर सम्पर्क कर अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखने हेतु स्थानांतरण प्रमाणपत्र देने के लिए आग्रह करने लगी और अपनी आपबीती सुनाई तब उक्त विद्यालय के प्रधान पाठक ने सहमति देते हुए कहा कि आप आकर ले जाना तत्पश्चात कुछ दिनों बाद टीसी प्राप्त करने हेतु दोबारा फोन की तो सम्बंधित प्रधान पाठक ने कहा कि आपकी बेटी का टीसी आपकी पति ले गए हैं तब जाकर उक्त महिला ने दिनांक 17/08/2021 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बरमकेला पहुंचकर टीसी की द्वितीय प्रति के लिए आवेदन लगाई जिस पर सम्बंधित अधिकारी ने उक्त स्कूल के प्रधान पाठक को लिखीत आदेश जारी किया जिसमें साफ साफ लिखा गया है कि नियमानुसार आवेदिका को स्थानांतरण प्रमाणपत्र की द्वितीय प्रति जारी किया जाए और उस आदेश को लेकर अगले दिन महिला ने अपने रिश्तेदार के साथ सम्बंधित स्कूल पहुंची तो वहां पर मौजूद प्रधान पाठक ने कहा कि आपके पति आपकी बेटी की टी सी ले गए हैं और उसे माध्यमिक शाला में भर्ती भी कर चुके हैं और मैं द्वितीय प्रति जारी करने से पहले बीईओ साहब से बात कर आपको बताऊंगा, इतनी बात सुनकर महिला अपनी घर वापस लौट आई उसके बाद प्रधान पाठक द्वारा किसी भी प्रकार से कोई जानकारी नहीं देने के कारण लगभग दस बारह दिनों बाद अपने भाइयों को आदेश को देकर पुन: उक्त विद्यालय को भेजी तो उस दिन प्रधान पाठक स्कूल में नहीं थे इसलिए वे लोग भी वापिस आ गए लेकिन अपनी बेटी को आगे पड़ाई करवाने हेतु दोबारा ख़ुद ही आज उक्त विद्यालय पहुंची तो वहां पर उपस्थित प्रधान पाठक ने कहा कि कल आप दोनों को (लड़की के पिता) बरमकेला बुलवाकर सहमति से स्थानांतरण प्रमाणपत्र देंगे, तब अपनी बेटी को आगे की पढ़ाई जारी रखने हेतु पीड़ीत माता थकी हारी निराश होकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अपनी आपबीती सुनाने परन्तु बदकिस्मती से बीईओ कार्यालय में उपस्थित नहीं थे इसलिए पीड़ीत माता अपनी मायके चली गई।
आईये जानते हैं क्या कहते हैं सम्बंधित स्कूल के प्रधान पाठक…..

मैंने लड़की के माता को कहा है कि बीईओ सर जी से बात कर आप दोनों को बुलाकर ही स्थानांतरण प्रमाणपत्र जारी कर पाऊंगा क्योंकि द्वितीय प्रति जारी करने के लिए जो चालान की रशीद है उसमें लिखा है उसके अनुसार टी सी नहीं गुमा है और न ही जल गया है इसलिए ऐसे ही टी सी जारी करना नियमानुसार संभव नहीं है। और हो सके तो मैं आज ही स्कूल की छुट्टी होने के बाद बीईओ कार्यालय पहुंचकर साहब से पूछूंगा।

आईए जानते हैं क्या कहते हैं बीईओ बरमकेला..
स्थानांतरण प्रमाणपत्र की द्वितीय प्रति जारी तभी किया जाता है जब वह गुम जाता है, आगजनी में जल गया हो या फिर जीर्ण हो गया है और रही बात द्वितीय प्रति जारी करने की तो द्वितीय प्रति से भर्ती नहीं कराया जा सकता है क्योंकि यह एथेंटिक नहीं माना जाता है। बहरहाल अब यह देखना लाजिमी होगा कि आखिर अब अपनी बेटी को आगे की पढ़ाई जारी रखने हेतु स्थानांतरण प्रमाणपत्र की द्वितीय प्रति मांग कर रही पीड़ित माता को न्याय दिलाने में शासन प्रशासन ध्यान देगी या अन्य मामलों की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है?