प्रायोजित ख़बर को लेकर सामने आएंगे पीड़ित पत्रकारिता के आड़ में लाखों की अवैध उगाही के उद्देश्य से चलाई गई फ़र्ज़ी खबरें 

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ऐसा ही एक प्रसंग जिले के घरघोड़ा नगर से सामने आया है। पीड़ित पक्ष  की माने तो इस प्रसंग की आड़ में जिला मुख्यालय से प्रकाशित हिने वाला दैनिक अखबार समूह ने उससे कथित तौर पर उससे लाखों रु की मांग रखी। मामले में अपनी जगह सही होने की वजह से पीड़ितों ने जब मांगी गई रकम  कथित सम्पादक को देने से इंकार किया तो उक्त व्यक्ति ने सिर्फ अपने समाचार पत्र पर आधी-अधूरी खबर प्रकाशित कर न केवल उनकी चरित्र हत्या करने बल्कि खुद को न्यायाधीश समझ कर पुलिस प्रशासन की कारवाही पर प्रश्न चिन्ह लगाने का प्रयास किया है। यही नही पीड़ित पक्ष का कहना है कि अगर ऐसे पूर्वग्रहीत और वसुलीबाज लोग पत्रकारिता के पेशे में रहेंगे तो इस पेशे की बदनामी स्वतः होने लगेगी। 

उक्त समाचार पत्र में दिनांक 1 मई 2021 को छपी खबर "क्या घरघोडा पुलिस नकाबिल या सेट"
मामला सरकारी कर्मचारियों पर हमले का.. पूरी तरह से पूर्वाग्रहीत और जानबूझकर आधी-अधूरी जानाकरियों के साथ सिर्फ सदृश्य अवैधानिक आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से छापी गई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि समाचार पत्र का प्रबन्धन और सम्पादक लगातार उनके विरुद्ध उल-जलूल खबरों का प्रकाशन करता रहा है। सम्बन्धित मामले में को लेकर उसने तब अप्रमाणित खबर छापी जब मामले में उन्हें उनका पक्ष जानते हुए विद्वान अपर सत्र न्यायाधीश घरघोड़ा ने उन्हें 25 मई 2021 को ही सशर्त अग्रिम जमानत का लाभ दिया है। जमानत होने के करीब एक सप्ताह बात अपने समाचार पत्र में कहीं अग्रिम जमानत का मौका तो नही.? दे रही घरघोड़ा पुलिस छापा जाना स्पष्ट रूप से न केवल पुलिस विभाग की निष्पक्ष कारवाही और एक प्रतिष्ठित और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी sdop सुशील नायक की कार्यशैली पर उंगली उठाने जैसा है बल्कि न्यायालीन आदेश का उपहास करने जैसा कृत्य भी प्रतीत होता है। 

जबकि समाचार प्रकाशन के पूर्व सम्बन्धित अखबार के सम्पादक को मामले से जुड़ी पूरी जानकारी एकत्र करनी थी। प्रकरण को अच्छी तरह से पढ़ना और समझना था। परन्तु खबरों की आड़ में अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति करने वाले उस पक्षपाती अखबार समूह ने फिर एक बार पत्रकारिता धर्म के विपरीत कार्य किया है। 

पीड़ित पक्ष ने बताया कि उनसे लगातार पैसौं की मांग को लेकर पूर्व में भी इस अखबार के सम्पादक और उनके सहयोगियों के विरुद्ध इस तरह के कृत्य किये जाने से आहत होकर उन्होंने न केवल उनके विरुद्ध पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत की है बल्कि माननीय न्यायालय में वाद दायर भी किया है। इस बार भी पीड़ित पक्ष उक्त पूर्वाग्रहीत समाचार पत्र प्रबन्धन और सम्पादक के विरुद्ध अतिरकित न्यायालीन वाद दायर करने के अलावा तथाकथित सम्पादक से जुड़े सभी काले कारनामों को समाज के सामने लाकर उन सभी मामलों पर उचित कानूनी कारवाही किए जाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।। पीड़ित पक्ष यह भी कहता है कि इस तरह के असमाजिक और पूर्वग्रहीत व्यक्ति जिस पेशे से जुड़े रहेंगे उस पेशे को बदनाम करने से नही चूकेंगे।। पत्रकारिता जैसे पवित्र समाजिक पेशे से जुड़े बुद्धिजीवी लोगों को ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए। साथ ही सम्बन्धित सम्पादक को इस बात का भान होना चाहिए कि जिनके घर शीशे के बने होते है उन्हके बात-बात पर दूसरे के घरों में पत्थर नही मारना चाहिए।।

पीड़ित पक्ष कहना है, समय आने पर वे सभी लोग उचित प्रमाणों के साथ जिले के मीडिया वर्ग के सामने आएंगे।। ताकि पत्रकारिता जगत से जुड़े इस कमजर्फ व्यक्ति की सच्चाई समाज के सामने आ पाए।।